Infosys Labour Codes Impact: नए नियमों से ₹1,289 करोड़ का झटका

Infosys Labour Codes Impact की वजह से IT दिग्गज कंपनी को दिसंबर तिमाही में ₹1,289 करोड़ का बड़ा खर्च उठाना पड़ा है। इस एकमुश्त खर्च के चलते Q3 में Infosys का मुनाफा साल-दर-साल आधार पर 2.2% घट गया।

Infosys, भारत की दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी, ने दिसंबर तिमाही के नतीजों में ₹1,289 करोड़ का Exceptional Charge (एक बार होने वाला खास खर्च) दर्ज किया है। यह खर्च नए Labour Codes (नई श्रम संहिताओं) के कानूनी असर की वजह से आया है।

कंपनी के मुताबिक, लेबर कोड से जुड़े ये एडजस्टमेंट मुख्य रूप से Gratuity Liability (ग्रेच्युटी देने की जिम्मेदारी) और Leave Liability (छुट्टियों से जुड़ी देनदारी) में बढ़ोतरी के कारण हुए हैं।

इन दोनों को मिलाकर ₹1,289 करोड़ का असर पड़ा है, जिसे कंपनी की Consolidated Statement of Comprehensive Income (कंपनी की समेकित आय रिपोर्ट) में दर्ज किया गया है।

इसी तरह, Tata Consultancy Services (TCS) ने 12 जनवरी को नए लेबर कोड की वजह से ₹2,128 करोड़ का Exceptional Charge दर्ज किया, जबकि HCLTech ने ₹956 करोड़ का ऐसा ही खर्च रिपोर्ट किया है।

लेबर कोड से जुड़े इस खर्च के बावजूद, Infosys ने अपने FY26 Revenue Growth Guidance (वित्त वर्ष 2025–26 के लिए कमाई की अनुमानित वृद्धि) को बढ़ाया है।

हालांकि, लेबर कोड से जुड़े खर्च के कारण कंपनी का Q3 FY26 Consolidated Net Profit (तीसरी तिमाही का शुद्ध मुनाफा) साल-दर-साल आधार पर 2% से ज्यादा गिर गया, जिससे बाजार की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं।

Infosys ने अब FY26 के लिए अपनी Revenue Growth Guidance को 3% से 3.5% के दायरे में संशोधित किया है।

वहीं, Q3 FY26 में Infosys का Consolidated Net Profit (समेकित शुद्ध मुनाफा) 2.2% घटकर ₹6,654 करोड़ रह गया।

नया Labour Code क्या है ?

21 नवंबर 2025 को भारत सरकार ने देश में चार नए Labour Codes लागू किए। इन लेबर कोड्स का मकसद देश के मौजूदा 29 श्रम कानूनों को सरल और आधुनिक बनाना, मजदूरों के कल्याण को बेहतर करना और भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स की नींव रखना है।

इन सुधारों के तहत पहली बार Gig Workers और Platform Workers (जैसे Swiggy, Zomato जैसी ऐप्स पर काम करने वाले डिलीवरी एग्जीक्यूटिव्स) को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है और उन्हें एक Formal Welfare Framework (आधिकारिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे) के दायरे में लाया गया है।

कुल मिलाकर, नए लेबर कोड्स ने जहां कंपनियों पर एक बार का बड़ा वित्तीय असर डाला है, वहीं लंबी अवधि में वर्कफोर्स के लिए संरचनात्मक बदलाव का रास्ता भी खोला है।

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सतीश कुमार, एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट (मुंबई) हैं, जिन्हें 2019 से शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और निवेश के साथ-साथ ब्लॉगिंग का भी अनुभव है। वे इस ब्लॉग के माध्यम से शेयर बाजार, आईपीओ, बिजनस और निवेशकों से जुड़ी ताज़ा खबरें आसान भाषा में प्रस्तुत करते हैं।

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