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NSE IPO: 5.71x Subscribe होने के बाद भी Share Price IPO Price से नीचे क्यों आया? ₹22,561 करोड़ का पैसा NSE को मिला भी नहीं

NSE IPO को निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। IPO कुल 5.71 गुना Subscribe हुआ। इस दौरान 50.58 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोली मिली, जबकि करीब 8.86 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखे गए थे।

लेकिन Listing के कुछ ही दिनों बाद NSE के शेयर IPO Price से नीचे आ गए। हाल की गिरावट में शेयर Listing Day के ऊपरी स्तर से भी 6% से ज्यादा नीचे आ चुका है।

अब सवाल यह है कि जब IPO 5.71 गुना Subscribe हुआ था, तो शेयर की कीमत नीचे क्यों आई? और ₹22,561 करोड़ के IPO से NSE को आखिर पैसा क्यों नहीं मिला?

IPO 5.71x Subscribe हुआ, फिर Share Price क्यों फिसला?

IPO का ज्यादा Subscribe होना सिर्फ यह बताता है कि बिक्री के दौरान शेयरों के लिए कितनी मांग थी। इसका मतलब यह नहीं है कि Listing के बाद शेयर की कीमत हमेशा ऊपर ही जाएगी।

NSE के शेयरों में Listing के बाद बिकवाली का दबाव देखने को मिला। इस दौरान भारतीय शेयर बाजार में भी कमजोरी थी।

मौजूद जानकारी के मुताबिक, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और US-Iran तनाव के बीच निवेशकों का रुख शेयर बाजार के प्रति सतर्क हुआ।

ऐसे माहौल में NSE के शेयरों पर भी दबाव आया और कीमत IPO के भाव से नीचे चली गई।

₹22,561 करोड़ का IPO था, लेकिन NSE को पैसा क्यों नहीं मिला?

NSE IPO पूरी तरह OFS यानी पुराने शेयरों की बिक्री था।

इस IPO में NSE ने नए शेयर जारी नहीं किए। इसके बजाय NSE के मौजूदा शेयरधारकों ने अपने शेयर बेचे।

IPO का कुल आकार करीब ₹22,561 करोड़ था और इसमें 12.64 करोड़ शेयर पुराने शेयरधारकों की ओर से बेचे गए।

इसका मतलब साफ है कि IPO से मिलने वाला पैसा NSE के कारोबार में नया पैसा बनकर नहीं आया। बिक्री से मिलने वाली रकम उन मौजूदा शेयरधारकों को गई, जिन्होंने अपने शेयर बेचे।

इन शेयरधारकों में Bank of Baroda, SBI, SBI Capital Markets, Canada Pension Plan Investment Board, Aranda Investments, New India Assurance Company, Stock Holding Corporation of India, MS Strategic, General Insurance Corporation of India और United India Insurance Company जैसे नाम शामिल थे।

NSE IPO में Retail Investors ने कितना हिस्सा लिया?

NSE IPO को कुल मिलाकर 5.71 गुना बोली मिली।

Retail Investors के लिए रखा गया हिस्सा 1.39 गुना Subscribe हुआ।

कुल मिलाकर 50,58,11,384 शेयरों के लिए बोली मिली, जबकि 8,86,42,911 शेयर बिक्री के लिए रखे गए थे।

इसके बावजूद Listing के बाद शेयर में गिरावट आई। इससे यह बात समझ आती है कि IPO के दौरान मिली मांग और Listing के बाद शेयर की कीमत दो अलग-अलग चीजें हैं।

क्या 5.71x Subscription से IPO की Valuation तय होती है?

सिर्फ Subscription देखकर IPO की कीमत को समझना सही नहीं होगा।

IPO के दौरान निवेशकों की मांग ज्यादा हो सकती है, लेकिन Listing के बाद बाजार की स्थिति, शेयर की कीमत, कंपनी का मूल्यांकन और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कई कारण शेयर पर असर डालते हैं।

NSE के मामले में भी Listing के बाद बाजार में कमजोरी और बिकवाली का दबाव देखने को मिला।

इसलिए 5.71 गुना Subscription होने के बावजूद शेयर का IPO Price से नीचे जाना संभव है।

US Bond Yield बढ़ने का NSE Share पर क्या असर पड़ा?

अमेरिका में 10 साल की Bond Yield बढ़कर करीब 5.2% तक पहुंच गई थी।

जब अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो कुछ निवेशकों के लिए वहां पैसा लगाना ज्यादा आकर्षक हो सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों जैसे भारत के शेयर बाजार पर भी दबाव आ सकता है।

इसी दौरान कच्चे तेल की कीमत भी बढ़ी। Brent Crude की कीमत 105.64 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की जानकारी दी गई है।

तेल की ऊंची कीमत और वैश्विक बाजार में तनाव ने भारतीय शेयर बाजार के माहौल पर दबाव डाला, जिसका असर NSE के शेयरों पर भी देखने को मिला।

NSE के कारोबार के लिए सबसे बड़ा जोखिम क्या है?

NSE के कारोबार का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में होने वाले कारोबार पर निर्भर करता है।

कंपनी के मुताबिक, 30 जून 2026 को खत्म तीन महीने में उसकी कुल परिचालन आय का 47% हिस्सा उसके 10 सबसे बड़े Trading Members से आया था।

FY26 में यह हिस्सा 46.78%, FY25 में 44.48% और FY24 में 45.26% था।

इसका मतलब है कि कुछ बड़े Trading Members से NSE को मिलने वाली कमाई काफी महत्वपूर्ण है।

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सतीश कुमार, एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट (मुंबई) हैं, जिन्हें 2019 से शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और निवेश के साथ-साथ ब्लॉगिंग का भी अनुभव है। वे इस ब्लॉग के माध्यम से शेयर बाजार, आईपीओ, बिजनस और निवेशकों से जुड़ी ताज़ा खबरें आसान भाषा में प्रस्तुत करते हैं।

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