इंडोनेशिया के शेयर बाजार से वैश्विक निवेशकों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर आई है।
शुक्रवार के कारोबारी सत्र में इंडोनेशिया के प्रमुख शेयर बाजार में 11.57 प्रतिशत की जबर्दस्त ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट जनवरी 1998 के बाद यानी पिछले 28 सालों में एक दिन के भीतर आई सबसे बड़ी (Indonesia Stock Market Crash) गिरावट है।
चौतरफा भारी बिकवाली के चलते बाजार में अफरातफरी मच गई और हालात को संभालने के लिए स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।
30 मिनट के लिए थमा कारोबार, 6 साल के निचले स्तर पर जकार्ता इंडेक्स
शुक्रवार को बाजार की शुरुआत ही भारी कमजोरी के साथ हुई थी। ट्रेडिंग शुरू होते ही मुख्य सूचकांक करीब 8 प्रतिशत टूटकर खुला।
इसके तुरंत बाद बिकवाली की रफ्तार इतनी ज्यादा तेज हो गई कि एक्सचेंज को कारोबार 30 मिनट के लिए पूरी तरह सस्पेंड करना पड़ा।
इस जोरदार गिरावट के बाद जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स फिसलकर छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
इस साल यानी 2026 में अब तक के पूरे प्रदर्शन को देखें तो इंडोनेशियाई शेयर बाजार में कुल मिलाकर करीब 40 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
सुबह खुलते ही निवेशकों के डूब गए ₹4 लाख करोड़
बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना गहरा था कि कुछ ही पलों में इंडोनेशियाई कंपनियों की कुल मार्केट कैप में भारी सेंध लग गई।
सुबह के शुरुआती कारोबार में ही इंडोनेशिया के शेयरों की कुल मार्केट वैल्यू में लगभग 760 ट्रिलियन रुपिया की कमी आ गई।
अगर उस समय की एक्सचेंज रेट के हिसाब से भारतीय मुद्रा में इसका आकलन किया जाए तो यह नुकसान करीब ₹4 लाख करोड़ बैठता है।
इस सुनामी का सबसे बड़ा असर देश के बैंकिंग शेयरों पर पड़ा। दिग्गज वित्तीय संस्थान जैसे बैंक सेंट्रल एशिया, बैंक राक्यत इंडोनेशिया और बैंक मंदिरी के शेयर देखते ही देखते 15 प्रतिशत तक लुढ़क गए।
MSCI की बड़ी चेतावनी बनी बाजार में कोहराम की वजह
इस अचानक आई भारी गिरावट के पीछे ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर एमएससीआई (MSCI) की एक चेतावनी को मुख्य कारण माना जा रहा है।
MSCI ने संकेत दिया है कि इंडोनेशिया को इमर्जिंग मार्केट (Emerging Market) का अपना दर्जा गंवाना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, देश को ग्लोबल शेयर सूचकांकों से भी पूरी तरह बाहर किया जा सकता है।
एमएससीआई के इस अचानक आए कड़े रुख के बाद विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों में डर का माहौल बन गया और उन्होंने तुरंत अपने पैसे निकालने शुरू कर दिए।
क्या होता है Standalone दर्जा और कैसे तय करती है MSCI?
ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI दुनिया भर के वित्तीय बाजारों को उनकी पारदर्शिता, लिक्विडिटी और रेगुलेटरी नियमों के आधार पर अलग-अलग कैटेगिरी में विभाजित करता है। इनमें डेवलप्ड, इमर्जिंग, फ्रंटियर और स्टैंडअलोन जैसी प्रमुख श्रेणियां शामिल हैं।
स्टैंडअलोन (Standalone) कैटेगिरी का सीधा मतलब यह होता है कि संबंधित बाजार MSCI के मुख्य सूचकांकों में बने रहने के लिए जरूरी कड़े मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है।
यदि इंडोनेशिया इमर्जिंग मार्केट से बाहर होकर स्टैंडअलोन सूची में जाता है, तो बड़े अंतरराष्ट्रीय फंड्स के लिए वहां निवेश बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
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