IPO Performance 2025 Analysis: क्यों आधे IPO लिस्टिंग के बाद फिसले?

IPO Performance 2025 ने कई रिकॉर्ड बनाए, लेकिन निवेशकों के लिए तस्वीर उतनी आसान नहीं रही। रिकॉर्ड फंड जुटाने के बावजूद लिस्टिंग गेन कमजोर रहे और रीटेल भागीदारी घटी।

भारत का IPO मार्केट 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। इस साल IPO के ज़रिए ₹1.76 लाख करोड़ जुटाए गए, जो 2024 के मुकाबले 10% ज़्यादा है।

यह पहली बार हुआ है जब भारत ने लगातार दो साल रिकॉर्ड IPO फंडरेज़िंग देखी है। हालाँकि, इस शानदार आंकड़े के पीछे निवेशकों के व्यवहार में एक साफ़ बदलाव भी देखने को मिला।

इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि 2025 के धमाकेदार IPOs में निवेशकों का रुख कैसा रहा? Listing के बाद शेयरों का प्रदर्शन कैसा रहा ?

रिकॉर्ड IPO के बावजूद बदला हुआ माहौल

जहाँ एक तरफ IPO फंडरेज़िंग ने नया रिकॉर्ड बनाया,वहीं दूसरी ओर Listing गेन कमजोर रहे ,रीटेल की भागीदारी में नरमी दिखी | यही संकेत देते हैं कि IPO मार्केट अब तेज़ी से परिपक्व हो रहा है और निवेशक ज़्यादा सोच-समझकर फैसले ले रहे हैं।

2025 में IPO से रिकॉर्ड पैसा आया, यानी नई कंपनियाँ शेयर बाज़ार से खूब फंड जुटा पाईं। लेकिन इसके बावजूद कुल एक्विटी मार्केट से जुटाया गया पैसा 18% कम होकर ₹3.06 लाख करोड़ रह गया, जबकि 2024 में यह ₹3.74 लाख करोड़ था।

वहीं Tata Capital 2025 का सबसे बड़ा IPO रहा, जिसने ₹15,512 करोड़ जुटाए।

Subscription और Retail Participation में गिरावट

डेटा से पता चलता है कि सिर्फ 60% IPOs को 10 गुना से ज़्यादा सब्स्क्रिप्शन मिला ,2024 में यह आंकड़ा 72% था | रीटेल की भागीदारी वर्ष 2024 मे 18.87 लाख था लेकिन वर्ष 2025 मे घटकर 14.99 लाख रह गया | इसका सीधा मतलब है की रीटेल निवेशकों की भागीदारी साफ़ तौर पर घटी।

2025 में रीटेल निवेशकों ने IPOs में करीब ₹2.95 लाख करोड़ के लिए आवेदन किया। यह रकम कुल IPO से जुटाए गए पैसे से 68% ज़्यादा थी। जबकि 2024 में यह जोश और भी ज़्यादा था 113%।

लेकिन असल में रीटेल निवेशकों को मिले शेयर सिर्फ़ ₹46,069 करोड़ के रहे,जो कुल IPO रकम का करीब 26% है।

IPO लिस्टिंग के बाद प्रदर्शन

इस साल जिन कंपनियों के शेयर लिस्ट हुए, उनमें से करीब आधी कंपनियाँ अब अपने आईपीओ प्राइस से नीचे ट्रेड कर रही हैं।

पिछले 12 महीनों में 344 कंपनियाँ शेयर बाज़ार में आईं और इन्होंने मिलकर ₹1.75 लाख करोड़ से ज़्यादा पैसा जुटाया। इनमें से 103 कंपनियों के शेयरों में 69 शेयर आईपीओ प्राइस से ऊपर खुले और 33 शेयर आईपीओ प्राइस से नीचे खुले लेकिन यह शुरुआती जोश ज़्यादा समय तक नहीं टिक पाया।

अभी की स्थिति ऐसी है की सिर्फ़ 54 IPO स्टॉक अपने इशू प्राइस से ऊपर हैं जबकि 47 शेयर अब आईपीओ प्राइस से नीचे आ चुके हैं |

SME IPOs में तेज़ी

SME IPO सेगमेंट में हलचल और भी तेज़ रही। साल 2025 में 267 SME IPOs आए, जिनसे कुल ₹11,430 करोड़ जुटाए गए। यह रकम 2024 के मुकाबले करीब 30% ज़्यादा है।

आने वाले समय के संकेत काफ़ी मज़बूत हैं। करीब 200 कंपनियाँ या तो SEBI से मंज़ूरी पा चुकी हैं या फिर मंजूरी का इंतज़ार कर रही हैं। इन कंपनियों का लक्ष्य है कि वे 2026 में मिलकर ₹2.6 लाख करोड़ से ज़्यादा पैसा शेयर बाज़ार से जुटाएँ।

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सतीश कुमार, एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट (मुंबई) हैं, जिन्हें 2019 से शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और निवेश के साथ-साथ ब्लॉगिंग का भी अनुभव है। वे इस ब्लॉग के माध्यम से शेयर बाजार, आईपीओ, तिमाही रिपोर्ट और फाइनेंस से जुड़ी ताज़ा खबरें आसान भाषा में प्रस्तुत करते हैं।

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