Tata Sons को लेकर RBI ने बड़ा फैसला लिया है। RBI ने कंपनी की NBFC के तौर पर रजिस्ट्रेशन खत्म करने की अर्जी खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद Tata Sons को अब Upper-Layer NBFC से जुड़े सभी नियमों का पालन करना होगा, जिसमें शेयर बाजार में लिस्टिंग भी शामिल है।
Tata Sons ने NBFC रजिस्ट्रेशन खत्म करने की अर्जी क्यों दी थी?
Tata Sons ने 2024 में RBI के पास अपना NBFC रजिस्ट्रेशन खत्म करने के लिए आवेदन किया था। कंपनी ने FY2024 में ₹21,813 करोड़ का पूरा कर्ज चुका दिया था।
कंपनी का तर्क था कि जब उस पर कोई कर्ज नहीं है, तो उसे NBFC के कड़े नियमों और अनिवार्य शेयर बाजार लिस्टिंग से छूट मिलनी चाहिए।
RBI ने Tata Sons की अर्जी क्यों खारिज की?
RBI के नियमों के अनुसार, जिस NBFC का अकेले का एसेट ₹1 लाख करोड़ या उससे ज्यादा होता है, उसे Upper-Layer NBFC की श्रेणी में रखा जाता है।
Tata Sons का एसेट इस तय सीमा से काफी ज्यादा है। ऐसे में कंपनी को Upper-Layer NBFC के नियमों का पालन करना होगा।
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August 2026 में RBI ने 17 Upper-Layer NBFC की नई सूची जारी की थी, जिसमें Tata Sons भी शामिल थी।
Tata Sons को कब तक लानी थी लिस्टिंग?
RBI ने September 2022 में Tata Sons को पहली बार Upper-Layer NBFC की श्रेणी में रखा था। नियमों के मुताबिक ऐसी कंपनियों को 3 साल के भीतर यानी September 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था।
हालांकि Tata Sons की रजिस्ट्रेशन खत्म करने की अर्जी लंबित होने के कारण अब तक कंपनी की लिस्टिंग नहीं हुई।
अब RBI की ओर से अर्जी खारिज होने के बाद Tata Sons को Upper-Layer NBFC के नियमों के तहत लिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
SP Group को Tata Sons IPO से क्या फायदा होगा?
Tata Sons में Shapoorji Pallonji Group यानी SP Group की करीब 18.4% हिस्सेदारी है।
अगर Tata Sons शेयर बाजार में लिस्ट होती है, तो SP Group के लिए अपनी हिस्सेदारी की बाजार कीमत तय करना आसान हो जाएगा। लिस्टिंग के बाद Tata Sons के शेयर की बाजार कीमत के आधार पर SP Group अपनी हिस्सेदारी का मूल्य देख सकेगा।
Tata Sons IPO को लेकर क्यों है इतना बड़ा मामला?
Tata Sons Tata Group की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। ऐसे में कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर निवेशकों और बाजार में काफी दिलचस्पी है।
RBI की ओर से रजिस्ट्रेशन खत्म करने की अर्जी खारिज होने के बाद अब Tata Sons के लिए Upper-Layer NBFC के नियमों का पालन करना जरूरी होगा। इसी वजह से कंपनी की लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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