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Cyber Fraud: पढ़े-लिखे लोग भी कैसे बन जाते हैं शिकार? Scammers दिमाग को ऐसे करते हैं Hack 

अगर आपको लगता है कि साइबर फ्रॉड का शिकार सिर्फ कम पढ़े-लिखे या टेक्नोलॉजी की कम जानकारी रखने वाले लोग होते हैं, तो यह सोच बदलने वाली है। IIT Madras की एक स्टडी में डॉक्टर, बैंककर्मी, IT प्रोफेशनल और साइबर सिक्योरिटी की जानकारी रखने वाले लोग भी ठगी का शिकार मिले। आखिर ऐसा क्या होता है कि समझदार इंसान भी स्कैमर के सामने कुछ देर के लिए सोचने-समझने की क्षमता खो देता है?

साइबर फ्रॉड में स्कैमर पैसे से पहले दिमाग पर हमला करते हैं

Cyber Fraud हमेशा किसी की जानकारी की कमी का फायदा उठाकर नहीं होती। कई बार स्कैमर जानबूझकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जिसमें सामने वाला डर, जल्दबाजी या भावनात्मक दबाव में आ जाता है।

IIT Madras के शोधकर्ताओं ने इसे “Engineered Brain Freeze” बताया है। आसान भाषा में समझें तो स्कैमर सामने वाले को इतना डर या दबाव में डाल देते हैं कि वह सामान्य स्थिति की तरह सवाल नहीं कर पाता और तुरंत उनकी बात मानने लगता है।

डॉक्टर और बैंककर्मी भी बन चुके हैं शिकार

IIT Madras की स्टडी में चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, नई दिल्ली और मुंबई के 33 साइबर फ्रॉड पीड़ितों से बातचीत की गई।

इन मामलों में निवेश के नाम पर ठगी, नौकरी के फर्जी ऑफर, डिजिटल पेमेंट फ्रॉड, मालवेयर और “डिजिटल अरेस्ट” जैसी ठगी शामिल थी।

खास बात यह रही कि पीड़ितों में डॉक्टर, बैंककर्मी, IT प्रोफेशनल, वित्त से जुड़े लोग और साइबर सिक्योरिटी की जानकारी रखने वाले लोग भी शामिल थे। यानी सिर्फ पढ़ाई या टेक्नोलॉजी की जानकारी होना साइबर फ्रॉड से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

स्कैमर कैसे बनाते हैं डर और जल्दबाजी का माहौल?

ठगी करने वाले अक्सर बातचीत की शुरुआत किसी गंभीर और डराने वाली बात से करते हैं। उदाहरण के लिए कोई कॉल करके कह सकता है कि आपके बैंक अकाउंट का इस्तेमाल गैरकानूनी काम में हुआ है।

कोई आधार से जुड़ी परेशानी बताकर गिरफ्तारी की धमकी दे सकता है। वहीं कुछ स्कैमर सीमित समय में बहुत ज्यादा रिटर्न देने वाला निवेश बताकर तुरंत पैसा लगाने का दबाव बनाते हैं।

कई मामलों में ठग खुद को सरकारी अधिकारी, पुलिस या किसी बड़ी संस्था का कर्मचारी बताते हैं।

इन सभी तरीकों में एक चीज समान होती है—सामने वाले को सोचने का समय न देना।

जब जिंदगी में पहले से तनाव हो, तब खतरा और बढ़ सकता है

शोधकर्ताओं के मुताबिक कुछ पीड़ित ऐसे समय में ठगी का शिकार हुए, जब वे पहले से किसी परेशानी से गुजर रहे थे।

परिवार में बीमारी, रिटायरमेंट, नौकरी की तलाश या काम का दबाव जैसी परिस्थितियों में अगर अचानक कोई डराने वाली कॉल आती है, तो व्यक्ति के लिए तुरंत सही फैसला लेना मुश्किल हो सकता है।

यही वजह है कि साइबर फ्रॉड को केवल “लापरवाही” का मामला समझना सही तस्वीर नहीं दिखाता।

2024 में साइबर क्राइम के मामले 17.9% बढ़े

National Crime Records Bureau यानी NCRB के आंकड़ों के मुताबिक देश में दर्ज साइबर क्राइम के मामले 2023 के 86,420 से बढ़कर 2024 में 1,01,928 हो गए। यानी एक साल में 17.9% की बढ़ोतरी हुई।

इसी दौरान कुल दर्ज अपराधों में करीब 6% की गिरावट दर्ज हुई। इससे पता चलता है कि डिजिटल तरीके से होने वाले अपराधों का खतरा लगातार बड़ा मुद्दा बन रहा है।

हर तीसरे व्यक्ति को मिलती हैं कुछ तरह की फर्जी कॉल

Lokniti-Centre for the Study of Developing Societies (CSDS) और Common Cause की 8,306 लोगों पर 16 राज्यों में की गई स्टडी भी साइबर ठगी के बढ़ते खतरे की तस्वीर दिखाती है।

सर्वे में करीब एक-तिहाई लोगों ने बताया कि उन्हें अक्सर ऐसी कॉल आती हैं, जिनमें किसी ऐसे सामान की डिलीवरी का दावा किया जाता है जिसे उन्होंने ऑर्डर ही नहीं किया।

करीब 27% लोगों ने बैंक अधिकारी बनकर निजी अकाउंट की जानकारी मांगने वाली कॉल बार-बार मिलने की बात कही। वहीं 31% लोगों ने ज्यादा रिटर्न का लालच देने वाली निवेश संबंधी कॉल का सामना किया।

करीब 23% लोगों को ऐसी कॉल मिलीं, जिनमें कहा गया कि उनका फोन किसी गैरकानूनी गतिविधि से जुड़ा है। इतने ही लोगों ने किसी अनजान नंबर से खुद को दोस्त बताकर तुरंत पैसे मांगने वाली कॉल का सामना किया।

करीब पांचवां हिस्सा ऐसे कॉल का भी शिकार हुआ, जिसमें पुलिस या किसी अधिकारी के नाम पर उनके दोस्त या रिश्तेदार के खतरे में होने या अपराध करने की बात कही गई।

ज्यादा ऑनलाइन रहने वालों को ज्यादा निशाना बनाया गया

सर्वे के आंकड़ों में यह भी सामने आया कि जो लोग इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताते हैं, उन्हें ठगी करने वालों की तरफ से निशाना बनाए जाने की संभावना ज्यादा दिखी।

आर्थिक स्थिति के लिहाज से भी वित्तीय ठगी का असर अलग-अलग समूहों में देखा गया। सर्वे में सबसे अमीर वर्ग के 57% लोगों को वित्तीय फ्रॉड का सामना करने की बात सामने आई, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 47% लोग भी डिजिटल फ्रॉड के शिकार बताए गए।

साइबर ठगी में सिर्फ पैसा ही नहीं जाता

साइबर फ्रॉड का असर बैंक अकाउंट से निकलने वाले पैसे तक सीमित नहीं रहता। पीड़ितों ने नींद न आने, शर्मिंदगी और मानसिक तनाव जैसी परेशानियों का भी जिक्र किया।

सर्वे के मुताबिक साइबर क्राइम के पीड़ितों में 10 में से 8 से ज्यादा लोगों ने आर्थिक नुकसान की बात कही। करीब 23% लोगों ने ₹20,000 से ज्यादा गंवाए।

वहीं 8% लोगों का नुकसान ₹1,000 तक रहा, जबकि 25% ने ₹1,001 से ₹5,000 और करीब 29% ने ₹5,000 से ₹20,000 तक गंवाए।

साइबर फ्रॉड का शिकार हों तो सबसे पहले क्या करें?

अगर किसी फ्रॉड में आपका पैसा चला गया है, तो सबसे जरूरी है कि कार्रवाई में देरी न करें।

तुरंत 1930 पर कॉल करके साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज करें या सरकारी साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें।

इसके अलावा किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर OTP, PIN, पासवर्ड, बैंक डिटेल या कोई अन्य निजी जानकारी साझा न करें।

सबसे आसान बचाव एक छोटा सा ब्रेक है—अगर कोई कॉल आपको डराकर या जल्दबाजी में फैसला लेने को मजबूर कर रही है, तो कॉल काटें और संबंधित बैंक, कंपनी या सरकारी विभाग के आधिकारिक नंबर से खुद जानकारी जांचें।

याद रखें, पुलिस वीडियो कॉल के जरिए “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती।

FAQs

क्या पढ़े-लिखे लोग भी साइबर फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं?

हां। IIT Madras की स्टडी में डॉक्टर, बैंककर्मी, IT प्रोफेशनल, वित्त विशेषज्ञ और साइबर सिक्योरिटी की जानकारी रखने वाले लोगों के भी साइबर फ्रॉड का शिकार होने के मामले सामने आए।

“Engineered Brain Freeze” क्या है?

यह ऐसी स्थिति को बताया गया है जिसमें स्कैमर डर, जल्दबाजी या भावनात्मक दबाव बनाकर व्यक्ति की सामान्य तरीके से सोचने और सवाल करने की क्षमता को कुछ समय के लिए प्रभावित कर देते हैं।

अगर साइबर फ्रॉड में पैसा चला जाए तो क्या करें?

तुरंत 1930 पर कॉल करें और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत की जाए, उतना बेहतर है।

क्या पुलिस डिजिटल अरेस्ट करती है?

नहीं। पुलिस वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती। ऐसी कॉल साइबर ठगी का संकेत हो सकती है।

साइबर ठगी से बचने का सबसे आसान तरीका क्या है?

किसी भी डराने वाली या जल्दबाजी वाली कॉल पर तुरंत कार्रवाई न करें। कॉल काटकर संबंधित बैंक, कंपनी या सरकारी विभाग से उसके आधिकारिक संपर्क के जरिए जानकारी की पुष्टि करें।

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सतीश कुमार, एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट (मुंबई) हैं, जिन्हें 2019 से शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और निवेश के साथ-साथ ब्लॉगिंग का भी अनुभव है। वे इस ब्लॉग के माध्यम से शेयर बाजार, आईपीओ, बिजनस और निवेशकों से जुड़ी ताज़ा खबरें आसान भाषा में प्रस्तुत करते हैं।

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